मत्तगयन्द सवैया छंद के उदाहरण
मत्तगयंद सवैया छंद के उदाहरण (Aligned मात्रा संरचना | Exam Oriented)
उदाहरण 1 – कवि: बिहारीलाल
पंक्ति 1:
कहत नटत रीझत खिझत मिलत खिलत लजियात
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पंक्ति 2:
भरे भौन में करत हैं नैनन ही सों बात
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व्याख्या: इसमें नायिका के हाव-भावों का चित्रण है। श्रृंगार रस प्रमुख है तथा अनुभावों के माध्यम से भाव प्रकट हुए हैं।
उदाहरण 2 – कवि: केशवदास
पंक्ति 1:
नख सिख रूप लख्यो जब ते तब ते मन मोह्यो मोहि
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पंक्ति 2:
छवि ऐसी छाई चित में और न भावै कोहि
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व्याख्या: नायिका के सौंदर्य का वर्णन है। आलंबन विभाव के रूप में नायिका और श्रृंगार रस स्पष्ट है।
उदाहरण 3 – कवि: पद्माकर
पंक्ति 1:
फूले वन उपवन सब मधुकर गूँजत आय
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पंक्ति 2:
रस बरसत अति चहुँ ओर मन हरषित छाय
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व्याख्या: वसंत ऋतु का सुंदर चित्रण है। उद्दीपन विभाव के माध्यम से हर्ष और श्रृंगार रस उत्पन्न हुआ है।
उदाहरण 4 – कवि: भूषण
पंक्ति 1:
इंद्र जिमि जंभ पर बाड़व जिमि अंभ पर
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पंक्ति 2:
रावन सों रण में राम जिमि लड़े
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व्याख्या: यह वीर रस का उत्कृष्ट उदाहरण है। उपमा अलंकार के माध्यम से राम की वीरता को दर्शाया गया है।
उदाहरण 5 – कवि: देव
पंक्ति 1:
नयनन में बस्यो श्याम मन में बस्यो हरि नाम
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पंक्ति 2:
जीवन भयो धन्य जब से भयो यह काम
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व्याख्या: यहाँ भक्ति रस और श्रृंगार भाव का सुंदर समन्वय है। भगवान को आलंबन विभाव के रूप में प्रस्तुत किया गया है।